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Archive for the ‘चित्र’ Category

लम्हा दर लम्हा चुराया हमने
फुर्सत के वो चंद लम्हे
एक मित्र के ब्लॉग से एक चित्र 

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Image Source: Dreamstime.com

शाम होने को है. पंछी अपने घोसले को लौट रहे हैं  मै खड़ा अकेला इन पंछियों का ताकता रहा . मै इनके  तरह खुशनसीब नहीं क्यूँ  हूँ. ये दिन भर अपने परिवार के लिए  दाना चुग शानझ पहर मे घर लौट जाते हैं. और मै अकेला इस शहर मे | जीवन की ये कैसी आपा धापी जहाँ खुद के लिए ही समय न हो | दिन भर अपने परिवार के लिए परिश्रम करो फिर शाम की तन्हाई | माँ मे कब घर आऊंगा, माँ मे कब घर आऊंगा |

आज का ये ब्लॉग पोस्ट मेरे जैसे अनेको तनहा इंसान को समर्पित है जो अपने घरों से दूर  जीवन यापन कर रहे हैं, शारीर भले ही दूर हो पर आत्मा और मन घर पे ही है

नरेन्द्र , के मेल ने आज मुझे फिर लिखने को विवश कर दिया… ख़ुशी है अपने पहले प्यार पे वापस आ के 🙂

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कभी कभी छोटे भी बस अपने व्यवहार से बड़े बन जाते हैं |
आश्चर्यजनक बात ये है की इसी तरह के ख्याल आज दोपहर से मेरे मन मस्तिस्क मे भी घूम रहे थे |
मजेदार बात मैंने अपने बुजुर्ग भाई साहब की तस्वीर भी ली थी की कहीं किसी दिन इनपे एक पोस्ट लिखूंगा |
पोस्ट तो अभिषेक आपने लिख दिया, तस्वीर मैं लगा देता हूँ 🙂

 

The Guard, keeper of faith 🙂

 

 

मैं जहाँ काम करता हूँ वहाँ एक चपरासी भी काम करता है, कभी कभी मुझे लगता है वह अपना काम शायद ज़्यादा मन लगाकर करता है बनिस्पत मेरे ! जब भी मैं उसे आते-जाते corridor में पूछता हूँ ‘और भैया, कैसे हो?’, वह दोनों हाथ जोड़कर कहता है, ‘बस मालिक, सब आप बड़े लोगों की कृपा है’ ! ऐसे न जाने कितने लोग हैं मेरे इर्द-गिर्द जिनकी नज़रों में मैं मैं न जाने क्यूँ बड़ा होकर भी अपनी नज़रों में ही अनायास छोटा हो जाता हूँ ! मुझे ऐसी दुनिया जहाँ किसी और के सामने कोई बि … Read More

via Abhishek’s (sub)Conscious / अवचेतन अभिषेक

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