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Archive for the ‘बिना श्रेणी’ Category

मधुशाला

Krazy Memoirs

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवाला
‘ किस पथ से जाऊँ? ‘ असमंजस में है वह भोलाभाला
अलग- अलग पथ बतलाते सब, पर मैं यह बतलाता हूँ –
‘ राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला ||


हाथों में आने से पहले नाज़ दिखाएगा प्याला
अधरों पर आने से पहले अदा दिखाएगी हाला
बहुतेरे इनकार करेगा साकी आने से पहले
पथिक, न घबरा जाना, पहले मान करेगी मधुशाला॥


यम आयेगा साकी बनकर साथ लिए काली हाला
पी न होश में फ़िर आएगा सुरा- विसुध यह मतवाला
यह अंतिम बेहोशी, अंतिम साकी, अंतिम प्याला है
पथिक, प्यार से पीना इसको फ़िर न मिलेगी मधुशाला॥




धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला,
मंदिर, मसजिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला,
पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका,
कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।।


मुसलमान औ’ हिन्दू है दो, एक, मगर…

View original post 324 और  शब्द

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रात की तन्हाई 

ये सूनापन 
तनहा अकेला
तेरी ही यादों मे खोया हुआ 
ओ मेरी चाँद परी
कैसी होगी तू 
क्या करती होगी |
क्या ये सच है…
तू मुझे सुन सकती है? 
तेरी ही आने का इंतज़ार है अब तो
नया सवेरा नयी ज़िन्दगी 
नयी उमंगें नयी तरंगे 
बस तेरा है इंतज़ार
माँ का दर्द, पापा का प्यार 
अब तक तो देखा है 
बस 
माँ के आँखों मे, और 
पापा के प्यार मे
अब बारी हमारी है 
इंतज़ार है तेरा 
मेरी नन्ही परी |
दूर होगी तन्हायी 
सूनापन, आएगा 
नया सवेरा नयी ज़िन्दगी 
नयी उमंगें नयी तरंगे 
बस तेरा है इंतज़ार

 

 

 

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आप सबों को हमारी और से दिवाली और छठ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं

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बिलकुल सही कहा है आपने सुरेन्द्र जी | आम आदमी त्रस्त है दिनों दिन इन भ्रस्टाचार के बढ़ते कुप्रभाओं से | राजनेता बस चुप्पी साध इंतज़ार करते हैं की कब मुद्दा ठंढा होगा| माना किसी एक आदमी को हिम्मत नहीं हुई लड़ाई का सञ्चालन करने की कभी, इसलिए श्री अन्ना को देश व्यापी समर्थन मिला | यदि उनकी जगह कोई और भी होता तो उसे भी जनता का समर्थन अवश्य मिलता | बात ये नहीं है की लड़ाई का सञ्चालन कौन कर रहा है .. बात है मुद्दे की|
कब तक ये राजनेता आम आदमी की चुप्पी पे नोट बनाते रहेंगे| डॉ मनमोहन कोई छवि, कांग्रेस मे रहते हुए भी , हमेशा बेदाग़ रही है| पर आज उनका इन सब मामलों से मुह फेर लेना अपने आप मे भ्रस्ट राजनेताओं का पक्ष लेने जैसा है| आज डॉ मनमोहन जी को अपनी छवि बेदाग़ साबित करनी होगी| उन्हें कम से कम जनता को ये बताना पड़ेगा की आखिर जब ये सब उनके नाक निचे हो रहा था तो उन्हें इसका आभास कैसे नहीं हुआ? और अगर आपको अपनी और अपने कैबिनेट के साथियों की पाक छवि पे विशवास है तो क्यूँ नहीं जन-लोकपाल बिल को सदन की मंजूरी मिलनी चाहिए|
राजनेताओं को जवाब देना पड़ेगा …

सहसा यह विश्वास ही नहीं होता कि आजाद भारत के राजनेता किस दुस्साहस के साथ जनता द्वारा उठाये गये मुद्दों को नकारने में लगे हैं। क्या भ्रष्टाचार के समर्थन या विरोध के बारे में भी कोई दो राय भी हो सकती हैं ? यह साफ साफ समझे जाने की आवश्यकता  है कि भारत की जनता के लिये ना तो बाबा रामदेव महत्वपूर्ण हैं और ना ही अन्ना हजारे। उसके लिये महत्व इस बात का है कि वह तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है और यदि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मुद्दे पर … Read More

via Surenderachaturvedi's Blog

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वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यश्यामलां मातरम्
शुभ्रज्योत्सनां पुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम् ।।

वन्दे मातरम् ।

 

देश मेरे देश मेरे मेरी जान हैं तू

देश मेरे देश मेरे मेरी शान हैं तू

 

आप लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

जय हिंद

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कभी कभी छोटे भी बस अपने व्यवहार से बड़े बन जाते हैं |
आश्चर्यजनक बात ये है की इसी तरह के ख्याल आज दोपहर से मेरे मन मस्तिस्क मे भी घूम रहे थे |
मजेदार बात मैंने अपने बुजुर्ग भाई साहब की तस्वीर भी ली थी की कहीं किसी दिन इनपे एक पोस्ट लिखूंगा |
पोस्ट तो अभिषेक आपने लिख दिया, तस्वीर मैं लगा देता हूँ 🙂

 

The Guard, keeper of faith 🙂

 

 

मैं जहाँ काम करता हूँ वहाँ एक चपरासी भी काम करता है, कभी कभी मुझे लगता है वह अपना काम शायद ज़्यादा मन लगाकर करता है बनिस्पत मेरे ! जब भी मैं उसे आते-जाते corridor में पूछता हूँ ‘और भैया, कैसे हो?’, वह दोनों हाथ जोड़कर कहता है, ‘बस मालिक, सब आप बड़े लोगों की कृपा है’ ! ऐसे न जाने कितने लोग हैं मेरे इर्द-गिर्द जिनकी नज़रों में मैं मैं न जाने क्यूँ बड़ा होकर भी अपनी नज़रों में ही अनायास छोटा हो जाता हूँ ! मुझे ऐसी दुनिया जहाँ किसी और के सामने कोई बि … Read More

via Abhishek’s (sub)Conscious / अवचेतन अभिषेक

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एक छोटी सी ख़ुशी, एक छोटी सी मुस्कराहट कमाल का गुल खलती है | कभी अनजाने लोगों को मिलवाती है तो कभी थप्पड़ का सबब भी बन जाती है | ये निर्भर करता है की आप इसका इस्तमाल कहाँ और किसपे करते हैं| 😉 बड़ी ही अनोखी है ये मुस्कराहट| आशीक की एक  छोटी सी मुस्कराहट – आपकी जान लेने का माद्दा भी रखती है तो कहीं  कैंसर, blood pressure  और  तनाव जैसी खतरनाक बीमारियाँ का उपचार भी कर सकती है|
इन्सल्लाह, [आलू-इंजमाम की याद आ गयी] 🙂 इस साल की शुरुआत बड़ी ही सुखद रही है|  पिछले वर्ष इस वक़्त मै अपने व्यवसाय को ले कर चिंतित था, ऐसे मे घर से मीलों दूर बैठा माँ पापा की याद सता रही थी, साथियों से बिछुड़ने का गम था, और नयी जीवनसाथी से मिलने की उत्सुकता|  इस वर्ष कुछ मकषद हैं पुरे करने को, कुछ संकल्प है निभाने को और कुछ साथी है जीवनभर साथ चलने को|
अनेको मक्शदों मे एक को निभाने का साथ वर्ड-प्रेस ने दिया है|  दैनिक या साप्ताहिक पोस्ट लिखने की चुनौती | मै यथाशक्ति इसे निभाने की कोशिश कर रहा हूँ| इस ब्लॉग पे भी और मेरी अंग्रेजी ब्लॉग “क्रेजी मेमोइर्स” पे भी| हालाँकि पाठकों के प्रतिक्रियाओं से मुझे दोनों ही जगह आनंद की प्राप्ति हुई है| हिंदी मे लिख अपने विचार व्यक्त करने मे मुझे ज्यादा ख़ुशी महसूस होती है| जहां वर्ड-प्रेस पे, पाठकों की इस ब्लॉग के प्रति रूचि देख मै काफी आनंदित रहा, वही क्रेजी मेमोइर्स की प्रतिक्रिया शुरू मे मेरे मनोकुल नहीं थी| पर नए साल के नए सूर्योदय ने जैसे क्रेजी मेमोइर्स की काया पलट दी हो| वर्ड-प्रेस के दैनिक चुनौती को स्वीकार करने के पश्चात सब कुछ अच्छा ही हो रहा है| ख़ास कर आज का दिन काफी संतोषजनक रहा| आज क्रेजी मेमोइर्स को १०००वें अतिथी की मेजबानी करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और साथ ही साथ इसकी एक पोस्ट वर्ड-प्रेस के चित्रित पोस्ट (featured post) की श्रेणी मे शामिल हुआ| ये एहसास मेरे लिए पुरूस्कार से कदापि कम नहीं|
उत्साह वर्धन के लिए मे अपने सभी अतिथियों (जिन्होंने ब्लॉग पे आके मेरा मान बढाया और जो भविष्य मे आने वाले हैं) का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ :)|
चित्रित पोस्ट (featured post) की श्रेणी मे शामिल

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