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अतृप्त अकांछा

 

Image via flickr

काश दुष्टों की भीर में अपना भी कोई नायक होता,
दुश्मनों में अपना भी कोई दोस्त होता|
नक़ल करने वाले कुछ अक्ल रखते,
भीर से कोई चेहरा अलग भी दिखता |
जोश वाले होश न खोते,  भीरु तलवार न ढोते,
भोजन का भूख से वास्ता होता,
जिस्म से रूह का रिश्ता होता |
यदि आग में आग होती,
तो नेता की कुर्सी , पुलिस का डंडा कबका जल गया होता |
चिंतन होता तो चिंता न होती,
प्रसंशा मिलाती तो पुरुस्कार के लिए व्यथा न होती,
धर्म होता तो धर्मान्धता रोती|
फिर इस धरा से बेहतर कोई स्वर्ग होता ||
– उदय चौधरी
नोट: श्री उदय चौधरी, मेरे चाचा जी हैं| विलक्षण प्रतिभा के स्वामी| बैंक मे कार्यरत हैं, समय मिलने पे कविता करते हैं| उन्ही की कविता ‘अतृप्त आकांछा’ की कुछ पंक्तियाँ मे यहाँ पेश कर रहा हूँ|

 

 

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पहल कर

 

चित्र द्वारा यादों ka आइना.blogspot.com

मची है एक हलचल सी
कुछ करने की,
मौके पे मौका देती जिंदगी ,
कितने को संभाला
कितना गवांया ,
जो खोया सो गया
मौका देती जिंदगी,
पर समय कहता
कुछ और ,
ध्यान रख…
मौका देती जिंदगी
पर मै जिंदगी नहीं
मै तो तेरा
समय हूँ
एक बार गया ..
तो वापस  नहीं आऊंगा…
पहल कर
वरना जिंदगी भी
थक कर मौके न देगी
पहल कर तू पहल कर !

 

 

वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यश्यामलां मातरम्
शुभ्रज्योत्सनां पुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम् ।।

वन्दे मातरम् ।

 

देश मेरे देश मेरे मेरी जान हैं तू

देश मेरे देश मेरे मेरी शान हैं तू

 

आप लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

जय हिंद

गलती किसकी?

भाग एक

चित्र द्वारा geneha.com

राधेश्याम जी  के लिए आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण था, आज उनका बेटा आई ऐ एस ऑफिसर बन के घर को आ रहा था | काश वो भी बेटे के पासिंग परेड मे जा सकते | अहंकार मनुज के बुध्दी का नाश कर देती है, पर ये अहंकार न था | ये तो कुछ और ही था |
बचपन से श्याम को उन्होंने अपना स्नेह प्रकट नहीं किया| अन्दर से पिता का प्यार हमेशा उम्दा पर कहीं ना कहीं कठोरता हावी रही|
श्याम कहाँ है, राधेश्याम जी  ने अपनी धर्म पत्नी, रमा से पूछा| देखो यहीं कहीं होगा शाम के ७ बजे कहाँ गया होगा |  तुमने अपने लाड प्यार से बिगाड़ के रख है उससे   कभी पूछ है स्कूल मे क्या करता है कैसी पढाई चल रही है.| अच्छा जैस मैंने अकेले ही श्याम को जन्म दिया है … तुम उसके पिता हो तुम नहीं पूछ सकते….क्या पूछोगे … कभी काम से फुर्सत मिले तब तो… जब देखो ऑफिस ऑफिस ऑफिस… अब तो घर मे भी खोल लो अपना दफ्तर…. हम तो तुम्हारे है ही कौन?… बस बस हो गया ताने मत मारा करो.. किसके लिए करता हूँ ये सब …|  माना हमारे लिए करते हो… श्याम के भविष्य के लिए करते हो … पर इसका क्या मतलब ऑफिस मे लगे रहोगे… ऑफिस के बाहर भी कोई दुनिया है या नहीं…तुम भी पूछ सकते हो… की कैसी पढाई चल रही है? आने दो आज… मे लेता हूँ खबर | लो हो गए शुरू फिर तुम… बच्चे को मार पित के नहीं प्यार दुलार से समझाया करो…|
भाई आज तो शामत है… रमेश ने धीमी आवाज़ मे कहा, आज सभी टीचर हमारी बेज्जती करेंगे माँ बाप के सामने… ओहो और फिर घर मे टेंशन वो अलग…श्याम चुपचाप इन सबों की बाटेंग सुन रहा था | एक तरह से अच्छा ही हैं मेरे घर से कोई नहीं आ रहा कम से कम इन सब लफड़ों से तो बचा हूँ| तभी रमेश ने श्याम को टोकते हुए कहा… श्याम, आज तो पेरेंट्स-टीचर मीटिंग है ना … तुम्हारे घर से कौन आ रहा है | कोई नहीं…| मतलब | कोई नहीं मतलब कोई नहीं| ये कह श्याम चलता बना|
आज तो स्कूल मे मीटिंग थी ना, बताया क्यूँ नहीं … जैसे बताने से आप चले ही जाते….slap … slap… ऐसे बात करते हैं पिता जी से….रोना धोना बंद करो … और आइंदे से जब भी कोई मीटिंग हो मुझे बताया करो| श्याम रोता हुआ चेहरा ले अपने कमरे मे चला गया| ऐसे भी कोई मारता है अपने बच्चे को… प्यार से भी बोल सकते थे| रमा तुम इसमें अपनी टांग मत अडाओ, तुम ही कहती हो बच्चे पे नज़र रखो कहीं बिगड़ ना जाए  और अब तुम ही….| मैंने कहा प्यार से भी….| रहने दो मेरा आज बेहेस करने का मूड नहीं …. ये कह कर राधेश्याम जी अपने स्टडी रूम को चल दिए…| रमा श्याम के कमरे के पास खड़ी देखती रही…उससे रहा नहीं गया… |         बेटा क्यूँ नहीं बताते तुम पापा को | क्या बताना माँ, सभी के पापा आते हैं बस मेरे ही पापा … श्याम रो पड़ा| पापा को बताते तो वो टाइम निकाल के जरूर आते| रहने दो माँ … तुम्ही बताओ… आखिरी बार जब स्कूल मे वार्षिक समारोह था , जब मुझे मेडल मिलने वाला था … तब तो बताया था न पापा को… आये क्या? उस समय तुम्हारे पापा को कोई जरूरी काम थे बेटा…हाँ माँ पाता है कितना जरूरी काम था… खैर रहने दो… कह देना अगली मीटिंग के बारे बता दूंगा…
राधेश्याम कुछ समझ नहीं पा रहा था, कैसे श्याम ऐसा हो गया
आपकी समझ से, किसकी गलती है और कहाँ?

 

 

 

वर्ल्ड कप मे अब चाँद ही महीने बचे हैं, ऐसे मे ये मसला बहुत ही गंभीर रूप ले सकता है| हालाँकि मैंने हालिया दिनों मे धोनी बाबा की कोई अच्छी पारी देखि नहीं| क्या आपने देखी है? पिछले साल के आंकड़े बताते हैं की धोनी बाबा के लिए साल २०१०, क्रिकेट के नजरोये से अच्छा तो बिलकुल ही नहीं रहा | एक भी सेंचुरी बाबा ने न लगायी, न ही कोई पारी को अपने दम ख़म पे जिताया हो | जब भी भारत मुश्किल मे पड़ा, सचिन, लक्ष्मण, रैना और हाल के दिनों मे भज्जी ही संकटमोचन बनके आये | क्या हो गया धोनी बाबा के छक्कों के बारिश की| अब वो छक्के देखने को नहीं मिलते|
वैसे भारतीय क्रिकेट का ये हाल हमेशा से रहा है, जो भी कप्तान बना उसके खुद के प्रदर्शन पे ग्रहण लगा गया | शायद गांगुली ही इसमें अपवाद थे|

 

 

माँ मै कब घर आऊंगा

Image Source: Dreamstime.com

शाम होने को है. पंछी अपने घोसले को लौट रहे हैं  मै खड़ा अकेला इन पंछियों का ताकता रहा . मै इनके  तरह खुशनसीब नहीं क्यूँ  हूँ. ये दिन भर अपने परिवार के लिए  दाना चुग शानझ पहर मे घर लौट जाते हैं. और मै अकेला इस शहर मे | जीवन की ये कैसी आपा धापी जहाँ खुद के लिए ही समय न हो | दिन भर अपने परिवार के लिए परिश्रम करो फिर शाम की तन्हाई | माँ मे कब घर आऊंगा, माँ मे कब घर आऊंगा |

आज का ये ब्लॉग पोस्ट मेरे जैसे अनेको तनहा इंसान को समर्पित है जो अपने घरों से दूर  जीवन यापन कर रहे हैं, शारीर भले ही दूर हो पर आत्मा और मन घर पे ही है

नरेन्द्र , के मेल ने आज मुझे फिर लिखने को विवश कर दिया… ख़ुशी है अपने पहले प्यार पे वापस आ के 🙂

कभी कभी छोटे भी बस अपने व्यवहार से बड़े बन जाते हैं |
आश्चर्यजनक बात ये है की इसी तरह के ख्याल आज दोपहर से मेरे मन मस्तिस्क मे भी घूम रहे थे |
मजेदार बात मैंने अपने बुजुर्ग भाई साहब की तस्वीर भी ली थी की कहीं किसी दिन इनपे एक पोस्ट लिखूंगा |
पोस्ट तो अभिषेक आपने लिख दिया, तस्वीर मैं लगा देता हूँ 🙂

 

The Guard, keeper of faith 🙂

 

 

मैं जहाँ काम करता हूँ वहाँ एक चपरासी भी काम करता है, कभी कभी मुझे लगता है वह अपना काम शायद ज़्यादा मन लगाकर करता है बनिस्पत मेरे ! जब भी मैं उसे आते-जाते corridor में पूछता हूँ ‘और भैया, कैसे हो?’, वह दोनों हाथ जोड़कर कहता है, ‘बस मालिक, सब आप बड़े लोगों की कृपा है’ ! ऐसे न जाने कितने लोग हैं मेरे इर्द-गिर्द जिनकी नज़रों में मैं मैं न जाने क्यूँ बड़ा होकर भी अपनी नज़रों में ही अनायास छोटा हो जाता हूँ ! मुझे ऐसी दुनिया जहाँ किसी और के सामने कोई बि … Read More

via Abhishek’s (sub)Conscious / अवचेतन अभिषेक

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